Monday, June 7, 2021

मेवाड़ का इतिहास भाग 4 || History of Mewar Part 4

मेवाड़ का इतिहास भाग 4 || History of Mewar Part 4

राणा सांगा के दो पत्निया - ( 1 ) धनबाई -- पुत्र - ( 1 ) भोजराज ( 2 ) रतन सिंह 

                                             ( 2 ) कर्मावती -- पुत्र ( 1 ) विक्र्मद्वित्य  ( 2 ) उदय सिंह 

राणा सांगा के बाद शासक बना :- रतन सिंह - बूँन्दी में अहेरिया उत्सव में भाग लेने गये, वहाँ बूँदी के

मेवाड़ का इतिहास,
चित्तौड़गढ़
शासक सूरजमल हांडा ने रतन सिंह की हत्या कर दी ( रतन सिंह और सूरजमल हांडा दोनों आपस में लड़ते हुये मारे गये ) इसके बाद शासक बना -- विक्रमादित्य ( 1531-36 ) - बूँदी का शासक सुजान सिंह हांडा बूँदी ले गया - सरक्षिका -- माँ कर्मावती 

1530 में बाबर के आक्रमण के दौरान सन्धि -- बाबर ने बेटी बनाया - 1530 में बाबर की मृत्यु 

24 मार्च 1533 को गुजरात के शासक बहादुर शाह ने आक्रमण किया -- रक्षा के लिए राखी भेजी -- हुमायुँ के पास - हुमायुँ ने रक्षा नहीं की - कर्मावती ने बहादुर शाह से संधि कर ली -- बहादुर शाह को रत्न जड़ित मुकुट व सोने की कमर पेटी दी | 

विक्रमादित्य से कुछ सामंत नाराज थे तो बहादुर शाह को पुनः आक्रमण के लिए उकसाने लगे -- बहादुर शाह ने कर्मावती पर पुनः आक्रमण 8 मार्च 1535 को कर दिया, इस युद्ध में कर्मावती पराजित हुई, कर्मावती ने जौहर कर लिया ( चितौड़ का दूसरा जौहर )

पृथ्वीराज सिसोदिया -- दासी पुत्र -- बनवीर ( बनवीर ने 1536 में विक्रमादित्य की हत्या करवा दी ) बनवीर शासक बना 1536-40 यह उदयसिंह को भी मारना चाहता था, पर बचा लिया माँ पनाधाय ने अपने बेटे चन्दन की बलि देकर चितौड़ से निकल कर कुम्भलगढ़ में शरण ली वहाँ इनकी देखभाल की आशा देवपुरा ने  ,और उदयसिंह ने मालदेव की सहायता से 1540 में बनवीर की हत्या कर दी | उदयसिंह शासक बने 1540 - 72 तक | 

( पन्नाधाय की छतरी - भानगढ़ , अलवर )

बनवीर ने तुलजा भवानी का मंदिर बनवाया ( चित्तौड़गढ़ में )

तौल की पद्धति प्रारम्भ की

उदयसिंह :- 1540-1572 

  • 1544 में शेरशाह सूरी की अधीनता स्वीकार कर ली | 
  • प्रथम मेवाड़ शासक जिसने अफगानियों की अधीनता सस्वीकार की | 
शेरशाह ने अपना प्रभाव बनाये रखने के लिए अपना सेनापति ख्वास खां को चितौड़  नियुक्त किया ,1545 में कालिंजर ( बिहार ) अभियान के दौरान शेरशाह की मृत्यु होने ( बारूद के हथगोले फेंकते समय एक हथगोला हाथ में फट गया जिससे मृत्यु ) पर उदयसिंह ख्वास खां को निकाल देता है | 
उदय सिंह के शासनकाल में दिल्ली का सुल्तान - अकबर -- सुलह कुल निति ( समझौता या दमन )
अकबर सुलह कुल निति के तहत ख़्वाजा के दर्शन करने अजमेर आया ,सांगानेर में अकबर व भारमल की मुलाकात मजनू खां चिगताई ने करवाई | 
20 जनवरी 1562 को भारमल ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली | 
मंगलो की अधीनता स्वीकार करने वाला राजपूत शासक | 
6 फरवरी 1562 को जोधा व् अकबर का विवाह साम्भर में |
अकबर ख़्वाजा के दर्शन कर नागौर होकर लौटा ,नागौर पर अकबर का अधिकार 1562 में नागौर का शासक जयमल पर अकबर का दबाव तो मेवाड़ में उदयसिंह की शरण में चला गया | 

1557 में हरमाड़ा के युद्ध में हांकी खां पठान ने पराजित किया -- उदयसिंह को ,उदयसिंह ने अधीनता स्वीकार नहीं की | 
अकबर ने फ़रमान आदेश भेजा ( 23 अक्टुम्बर 1567 ) आक्रमण कर अधिकार किया -- उदयसिंह स्वयं चले गये -- गोगुन्दा 
2 सेनापति को पीछे छोड़ गये ( 1 ) जयमल ( 2 ) पत्ता -- दोनों लड़ते हुये मारे गये 
पत्ता की रनी फूलकुंवर ने जौहर किया ( चितौड़ का तीसरा और अंतिम जौहर )
जयमल अकबर की संग्राम बन्दुक से घायल
भतीजा कल्ला जी -- ने कंधे पर उठा कर युद्ध किया 
                                 चार हाथों के लोकदेवता 
                                 प्रमुख पीठ -- रनेला,सलूम्बर उदयपुर 
                                 छतरी -- चित्तौड़गढ़ 
इस युद्ध में अकबर की विजय -- जित पर जितनामा / फ़तेहनामा जारी किया -- कत्लेआम का आदेश दिया -- अकबर के जीवन का अमिट कलंक 
अकबर ने जयमल और पत्ता के युद्ध कौशल से प[रभवित प्रभावित होकर दोनों की प्रतिमा लगवाई आगरा  लाल किले के द्वार पर 

राजस्थान में बीकानेर के रायसिंह दोनों की प्रतिमा -- जूनागढ़ दुर्ग के द्वार पर लगवाई 
उदयसिंह ने उदयपुर बसाया 1559 में 
                    उदय सागर झील का निर्माण करवाया 1565 में
उदयसिंह की मृत्यु 28 फरवरी 1572 को होली के दिन हुई थी |

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