Monday, 26 August 2013

राजस्थान: जलवायु, तापमान, वर्षा / Rajasthan: Climate, Temperature and Rainfall

तापक्रम, वर्षा व आर्द्रता के आधार पर राजस्थान को पांच मुख्य प्रदेशों में बांटा गया है -
1. शुष्क जलवायु प्रदेश
2. अर्द्धशुष्क जलवायु प्रदेश
3. उपआर्द्र जलवायु प्रदेश
4. आर्द्र जलवायु प्रदेश
5. अति आर्द्र जलवायु प्रदेश
पूर्वी राजस्थान - अर्द्धशुष्क जलवायु

दक्षिणि राजस्थान - आर्द्र जलवायु

दक्षिण पूर्वी राजस्थान - उप आर्द्र जलवायु

पश्चिमी राज - शुष्क जलवायु

राजस्थान में ग्रीष्म ऋतु में गर्म व शुष्क हवाएं चलती है जिन्हे स्थानीय भाषा में लू कहते है।

पश्चिम राजस्थान में ग्रीष्म ऋतु में निम्न वायुदाब के वायु भंवर (चक्रवात) आते है जिन्हे स्थानीय भाषा में ‘भभूल्या’ कहते है।

राजस्थान की जलवायु शुष्क प्रकार की है।

पश्चिमी राजस्थान में विद्यमान दो प्रमुख जलवायवीय दशाएं -
1. कम वर्षा और उसका अनिश्चित वितरण
2. उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापमान
पश्चिमी राजस्थान में तापमान की अतिश्यता का सबसे प्रमुख कारण है - धरातल का स्वभाव

राजस्थान के दक्षिणी व दक्षिण-पूर्वी भाग में तापमान अपेक्षाकृत कम रहने का प्रमुख कारण है - समुद्रतल से उचाई

राजस्थान के किस भौगोलिक क्षेत्र में दैनिक तापांतर सबसे अधिक रहता है - पश्चिमी राजस्थान

राजस्थान में सबसे गर्म महिना - जून

राजस्थान में सबसे ठंडा महिना - जनवरी

राजस्थान के किस भौगोलिक क्षेत्र में जनवरी माह में सबसे कम तापमान रहता है - उतरी क्षेत्र में

ग्रीष्म ऋतु में राजस्थान के किस भौगोलिक क्षेत्र में कम वायुदाब का क्षेत्र बनता है - उतरी पश्चिमी क्षेत्र में

ग्रीष्म ऋतु में राजस्थान के किस जिले में सर्वाधिक आंधिया चलती है - गंगानगर

राजस्थान में ग्रीष्म ऋतु में उच्चतम तापमान रहता है - 44 डिग्री से 48 डिग्री सेल्सियस

राजस्थान में ग्रीष्म ऋतु में उच्चतम तापमान वाले क्षेत्र - फलौदी, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर

राजस्थान में हवाएं प्रायः दक्षिण पश्चिम व पश्चिम से उतर पूर्व एवं पूर्व की  ओर चलती है।

राजस्थान में किस माह में हवाएं सबसे तेज/अधिक चलती है - जून

राजस्थान में किस माह में हवाएं सबसे धीमी/कम चलती है - नवम्बर

राजस्थान में हवाओं के चलने की अधिकतम गति 140 किमी/घंटा होती है।

पूर्वी राजस्थान में शीत ऋतु कम ठंडी व ग्रीष्म ऋतु कम गर्म होती है तथा हवा में सदैव आद्रता की मात्रा बनी रहती है।

राजस्थान में शीत ऋतु को दो भागों में विभक्त किया गया है -
1. मानसून प्रत्यावर्तन काल - अक्टूबर से मध्य नवंबर
2. शीत ऋतु  - मध्य नवंबर से फरवरी
राजस्थान में शीत ऋतु में न्यूनतम तापमान वाले क्षेत्र (-2 से. तक) - गंगानगर, बीकानेर, चुरू, फलौदी, जैसलमेर, पिलानी व झुंझूनू

राजस्थान के उतरी पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश में गर्मियों में उच्चतम तापमान 48 डिग्री, सर्दियों में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री से भी नीचे तथा वार्षिक वर्षा का औसत 20 से 25 सेमी होता है।

मध्यवर्ती अरावली पर्वतीय प्रदेश में जनवरी का तापमान 10 से 16 डिग्री सेल्सियस  के मध्य तथा मई जून में 28 से 34 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है।

अक्षांशीय स्थिति के अनुसार राजस्थान के कौनसे दो जिले उष्ण कटिबंध क्षेत्रों में आते है - बांसवाड़ा, डूंगरपुर 

सर्वाधिक उष्ण कटिबंधिय जिला - बांसवाड़ा

जलवायवीय दृष्टि (भौगोलिक) से राजस्थान किस कटिबंध में आता है - उपोष्ण

गर्मियों में राजस्थान के उतर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर तथा उतर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की ओर तापमान में कमी दृष्टिगोचर होती है जबकि सर्दियों में इसके ठीक विपरित होता है।

राजस्थान के संपूर्व उतरी पश्चिमी क्षेत्र की जलवायु है - विषम जलवायु

जलवायु की दृष्टि से राजस्थान का अधिकांश भाग शीतोष्ण (उपोष्ण) कटिबंध में स्थित है क्योंकि यह कर्क रेखा के उतर में स्थित है।

21 जून को कर्क रेखा पर प्रकाश की अवधि 13 घंटे 27 मिनट होगी तथा सूर्य की किरणों का कोण 90 डिग्री होता है। कर्क रेखा बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ नामक स्थान से होकर गुजरती है।

राजस्थान के किस जिले में सबसे पहले सूर्योदय होता है - धौलपुर

राजस्थान के किस जिले में सबसे बाद में सूर्योदय होता है - जैसलमेर

राजस्थान अपनी अक्षांशीय स्थिति के अनुसार यद्यपि उष्ण कटिबंध के बाहर स्थित है परंतु इसकी जलवायु उष्ण या विषम है।

राजस्थान के किस जिले में सूर्य की किरणों का सीधापन सर्वाधिक होता है - बांसवाड़ा

राजस्थान के किस जिले में सूर्य की किरणों का तिरछापन सर्वाधिक होता है - गंगानगर

बांसवाड़ा में दिन सर्वाधिक बड़ा होने व गंगानगर में दिन सर्वाधिक छोटा होने (बांसवाड़ा में रात सर्वाधिक छोटी होने व गंगानगर में रात सर्वाधिक बड़ी होने) की भौगोलिक घटना होती है। (नोट: यह कथन वर्ष के किसी भी समय शेष राजस्थान की अपेक्षा के संदर्भ में है।)

जून माह में राजस्थान में अधिकतम तापमान 32 डिंग्री (दक्षिण राजस्थान) से 44 डिग्री (उतरी राजस्थान) के बीच रहता है।

ग्रीष्म ऋतु में बीकानेर, बाड़मेर, फलौदी, चुरू, गंगानगर आदि में दिन का तापमान कई बार 49 डिग्री तक पहुंच जाता है। (इसका प्रमुख कारण बालू का स्वभाव, निम्न सापेक्षिक आर्द्रता, वनस्पति की कमी व समुद्रतट से दूरी है।)

राजस्थान की दक्षिण-पश्चिमी सीमा कच्छ की खाडी (225 किमी) व अरब सागर (400 किमी) के निकटतम हैं इस कारण इस क्षेत्र के जिलों का अधिकतम तापमान राजस्थान के अधिकतम तापमान से 15-20 डिग्री कम रहता है।  

सिरोही के माउंट आबू मे जून माह में दिन का अधिकतम तापमान भी कई बार 32 डिग्री से कम रहता है। (इसका प्रमुख कारण मा. आबू का औसत समुद्र तल से अधिक उंचाई पर स्थित होना है।

राजस्थान के किस क्षेत्र का (में) अधिकतम औसत तापमान कम रहता है - दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र (ग्रीष्म ऋतु में शेष राजस्थान की अपेक्षा)

राजस्थान के किस क्षेत्र में अधिकतम औसत तापमान अधिक रहता है - उतरी क्षेत्र में (ग्रीष्म ऋतु में शेष राजस्थान की अपेक्षा)

ग्रीष्म ऋतु में राजस्थान में तापमान उतर से दक्षिण-पश्चिम की ओर कम होता जाता है।

जून माह में 42 डिग्री से अधिक औसत तापमान गंगानगर व हनुमानगढ जिलों में रहता है।

तापमान बढने से वायुदाब कम होता है। इस कारण ग्रीष्म ऋतु में राजस्थान का पश्चिमी क्षेत्र कम वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है। ग्रीष्म ऋतु के प्रांरभ में हवाएं पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है, जिन्हे लू कहते है। जून के अंत तक हवाओं की दिशा दक्षिण-पश्चिम से उतर-पूर्व हो जाती है।

जून माह में राजस्थान के दक्षिण व दक्षिण-पश्चिमी जिलों में औसत तापमान 32 से 38 डिग्री के बीच रहता है।

ग्रीष्म ऋतु में आंधियों की संख्या व समयावधि पश्चिम व उतर पश्चिम से पूर्व व दक्षिण-पूर्व की ओर कम होती जाती है। (27 दिन), बीकानेर (18दिन), जैसलमेर (16 दिन), बाड़मेर (13 दिन) में आती है।

21 मार्च - दिन रात बराबर

21 मार्च - 21 जून - दिन की अवधि लगातार बढती जाती है।

21 जून - दिन की सबसे लम्बी अवधि

21 जून - 22 सितम्बर - दिन बड़े होते है लेकिन दिन की अवधि क्रमश घटती है

23 सितम्बर - दिन-रात बराबर

24 सितम्बर - 22 दिसम्बर - दिन की अवधि लगातार घटती जाती है।

22 दिसम्बर - दिन की सबसे छोटी अवधि

23 दिसम्बर - 20 मार्च - दिन छोटे होते है लेकिन दिन की अवधि क्रमश बढती है।

जनवरी माह में न्यूनतम औसत तापमान उतरी राजस्थान में 6 डिग्री तथा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान व पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर जिले में न्यूनतम औसत तापमान 10 डिग्री से अधिक रहता है। इस प्रकार जनवरी में तापमान उतर से दक्षिण-पूर्व की ओर बढता है।

शीत ऋतु में राजस्थान में हवाएं उतर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर चलती है अर्थात शीत ऋतु में राजस्थान में उतरी-पश्चिमी हवाएं  चलती है।

स्टेपी घास राजस्थान के किस जलवायवीय प्रदेश में पाई जाती है - शुष्क जलवायु प्रदेश

उपोष्ण सदाहरित वनस्पति - आर्द्र जलवायु प्रदेश में

उपोष्ण कटिबंधिय पर्वतीय वन - उप आर्द्र जलवायु प्रदेश में

राजस्थान में ग्रीष्म ऋतु में पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली तेज गर्म हवाओं को कहते है - लू

शीत ऋतु में राजस्थान में चलने वाली ठंडी हवाओं को स्थानीय भाषा में कहते हैं - डांफर

दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 32 डिग्री से. व शीत ऋतु में 14 से 17 से. तक रहता है।

राजस्थान का सबसे शुष्क स्थान - फलौदी

माउंट आबू और झालावाड़ एक ही अक्षांश पर स्थित है, लेकिन जून माह में माउंट आबू पर औसत तापमान 32 डिग्री से. तथा झालावाड़ में औसत अधिकतम तापमान 40 डिग्री से. रहता है, इसका कारण दोनों स्थानों की समुद्र तल से उंचाई है। (मा. आबू समुद्र तल से औसत उंचाई 1700 मीटर है जबकि झालावाड़ 410 मीटर की उंचाई पर स्थित है।)

राजस्थान में 50 सेमी मान वाली समवर्षा रेखा के पूर्व में अर्द्ध शुष्क, दक्षिण व दक्षिण-पूर्व में आर्द्र तथा उप आर्द्र और पश्चिम में शुष्क जलवायु पाई जाती है।

21 मार्च के बाद से ही सूर्य की किरणे पृथ्वी के उतरी गोलार्द्ध में सीधी पड़ना प्रारंभ हो जाती है। राजस्थान उतरी गोलार्द्ध में स्थित है। अतः राजस्थान में मार्च माह से ही तापमान का बढना प्रांरभ हो जाता है। 

राजस्थान के दक्षिण में बांसवाड़ा जिले से गुजरने वाली कर्क रेखा 21 मार्च को प्रकाश की अवधि 12 घंटे व सूर्य की किरणों का कोण मध्याह्न के समय 66’30’ रहता है। 21 जून को कर्क रेखा पर प्रकाश की अवधि 13 घंटे 27 मिनट तथा सूर्य की किरणों का कोण मध्याह्न के समय 90 डिग्री रहता है। इस प्रकार 21 जून को बांसवाड़ा में सर्य की किरणों का सीधापन सर्वाधिक होता है तथा शेष राजस्थान की अपेक्षा यहां दिन बड़ा व रात छोटी होती है।

समुद्रतल से अधिक उंचाई पर कम तापमान व समुद्र तल से कम उंचाई पर अधिक तापमान रहता है।

राजस्थान के अक्षांशीय विस्तार के कारण दक्षिण से उतर तक तापमान में लगभग 10 डिग्री से. का अंतर रहता है।

अति आर्द्र जलवायु प्रदेश/क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दो जिले है - झालावाड़, बांसवाड़ा

ट्रिवार्था के अनुसार राजस्थान का अधिकांश भाग Bsh जलवायु क्षेत्र में जबकि थार्नवेट के अनुसार DA'W' जलवायु क्षेत्र में आता है।

राजस्थान में लगभग सारी वर्षा गर्मियों में दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होती है। शीतकाल में बहुत कम वर्षा होती है, वह भी केवल उतरी - पश्चिमी राजस्थान में।

राजस्थान में अरावली पर्वतमाला का विस्तार मानसूनी हवाओं के समानान्तर होने व उंचाई अधिक न होने के  कारण  यह श्रेणियां जल से भरी हवाओं को रोककर अधिक वर्षा कराने में सहायक नहीं हैं

राजस्थान में वर्षा के औसत दिनों की संख्या है - 20 दिन

राजस्थान के किस जिले में वर्षा के औसत दिनों की सख्या सर्वाधिक है - झालावाड़ (20 दिन)

राजस्थान के किस स्थान में वर्षा के औसत दिनों की संख्या सर्वाधिक है/ वर्षा के औसत दिनों की सर्वाधिक संख्या वाला स्थान - मा. आबू (48 दिन)

राजस्थान के किस जिले में वर्षा के औसत दिनों की संख्या सबसे कम है - जैसलमेर (5दिन)

झालावाड़ में वर्षा के औसत दिनों की संख्या 40, बांसवाड़ा में 38, जैसलमेर में 5 व मा. आबू में 48 है।

राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा जुलाई माह में होती है।

जलवायु प्रदेश -  औसत वार्षिक वर्षा
1. शुष्क जलवायु प्रदेश -  10 से 20 सेमी
2. अर्द्धशुष्क जलवायु प्रदेश -  20 से 40 सेमी
3. उप आर्द्र जलवायु प्रदेश -  40 से 60 सेमी
4. आर्द्र जलवायु प्रदेश -  60 से 80 सेमी
5. अति आर्द्र जलवायु प्रदेश -  80 से 120-150 सेमी
राजस्थान में वर्षा की मात्रा दक्षिण-पूर्व से उतर-पश्चिम की ओर कम होती जाती है।

राजस्थान के वर्षा मानचित्र में समवृष्टि रेखाएं पूर्वी क्षेत्र में अपेक्षाकृत पास-पास है क्योंकि राज्य के पूर्वी क्षेत्र में वर्षा की मात्रा में परिवर्तन/कमी तीव्रता से आती है।

राजस्थान में मानसून प्रत्यावर्तन/निवर्तन/गमन/जाने का समय है - अक्टूबर से मध्य नवम्बर

कौनसी समवर्षा रेखा राजस्थान को जलवायु की दृष्टि से दो भागों में बांटती है - 50 सेमी

बांसवाड़ा जिले में वार्षिक वर्षा का मान है - 90 से 100 सेमी

राजस्थान में प्रवेश करने वाले पश्चिमी विक्षोभों की उत्पति का क्षेत्र है - भूमध्य सागर

राजस्थान का कौनसा क्षेत्र बंगाल की खाड़ी व अरब सागर दोनों ही मानसून से वर्षा प्राप्त करता है - दक्षिण-पश्चिम

राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला जिला है - जैसलमेर

राजस्थान में सर्वाधिक आर्द्र जिले झालावाड़ में वार्षिक वर्षा का औसत है - 95 सेमी

राजस्थान के सर्वाधिक आर्द्र स्थान मा. आबू में वार्षिक वर्षा का औसत है - 150 सेमी से अधिक

राजस्थान में वार्षिक वर्षा का औसत है - 57.5 सेमी

राजस्थान के पश्चिमी मरूस्थली जिलों में वार्षिक वर्षा की परिवर्तिता 60 प्रतिशत से भी अधिक है, जो सूखा व अकाल का मुख्य कारण है।

राजस्थान में वर्षा की विश्वसनीयता क्षेत्र एवं समय दोनों ही दृष्टियों से अनिश्चित है।

राजस्थान में कम वर्षा होने का सबसे प्रमुख कारण - दक्षिण-पूर्वी हवाओं में आर्द्रता की कमी

राजस्थान में 1 जून से 15 अगस्त तक सामान्यतः 35 सेमी (351 मिमि) वर्षा होती है।

राजस्थान में वर्षा का क्रम दक्षिण-पश्चिम से उतर-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व से उतर-पश्चिम की ओर घटता जाता है।

राजस्थान के पठारी प्रदेश में वर्षा की मात्रा - 60 से 100 सेमी.

राजस्थान के पूर्वी मैदानी प्रदेश में वार्षिक वर्षा का औसत - 60 से 100 सेमी

वार्षिक वर्षा के घटते क्रम में प्रमुख चार जिले - झालावाड़-बांसवाड़ा-बारां-कोटा

अरब सागरीय मानसूनी हवाओं से राजस्थान के दक्षिणी जिलों में पर्याप्त वर्षा होती है।

राजस्थान के किस जिले में/की वार्षिक वर्षा में विषमता/अंतर का प्रतिशत सर्वाधिक है/सर्वाधिक वर्षा क्षेत्र  विषमता वाला जिला - बाड़मेर (बाड़मेर जिले के जालोर के निकटवर्ती क्षेत्रों पर काफी अच्छी वर्षा होती है जबकि जैसलमेर के निकटवर्ती क्षेत्रों में बेहद कम वर्षा होती है।)

मावठ वर्षा राजस्थान के किस भाग में सर्वाधिक वर्षा होती है - उतर-पश्चिमी भाग

राजस्थान के उतरी-पश्चिमी जिलों में दिसम्बर से फरवरी तक भूमध्यसागर से आने वाली पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा को क्या कहते है - मावठ

राज्य में मध्य जून से सितम्बर तक वर्षा ऋतु रहती है। राज्य में होने वाली कुल वर्षा की 34 प्रतिशत वर्षा जुलाई में व 33 प्रतिशत वर्षा अगस्त में होती है।

राजस्थान में वार्षिक वर्षा का औसत 57.5 सेमी है जिसका वितरण 10 से 100 सेमी के मध्य है।

अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में स्थित जिलों में वर्षा का वार्षिक वितरण 10 से 50 सेमी के मध्य तथा अरावली के पूर्व में स्थित जिलों में वर्षा का वार्षिक वितरण 55 सेमी (अजमेर) से 100 सेमी (झालावाड़) में मध्य है।

राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र - जैसलमेर का उतरी-पश्चिमी भाग (10 सेमी)

अरावली पर्वतीय प्रदेश में वर्षा का औसत 50 से 70 सेमी है तथा मैदानी भू भागों में वार्षिक वर्षा का औसत 60 से 85 सेमी है।

राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला जिला - झालावाड़

राजस्थान में वार्षिक वर्षा का सर्वाधिक औसत दक्षिणी अरावली व दक्षिण्-पूर्वी पठारी भाग में है, जो 90 सेमी से अधिक हैं।

राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान सिरोही जिले में माउंट आबू है, जहां वार्षिक वर्षा का औसत 150 सेमी से अधिक है।

क्षेत्र - वार्षिक वर्षा
जैसलमेर - 10-20 सेमी
गंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर - 20-30 सेमी
हनुमानगढ, चुरू, नागौर, जोधपुर, जालोर - 30-40 सेमी
सीकर, झुंझुनू, पाली - 40-50 सेमी
बांसवाड़ा - 90-100 सेमी
झालावाड़ - 100 सेमी से अधिक
माउंट आबू - 150 सेमी से अधिक
राजस्थान में वर्षा की मात्रा दक्षिण-पूर्व से उतर-पश्चिम की ओर कम होती जाती है, लेकिन 50 सेमी मान वाली समवर्षा रेखा के पूर्व में  वर्षा की मात्रा में कमी तीव्रता से आती है जबकि इस समवर्षा रेखा के पश्चिम में वर्षा की मात्रा में कमी धीमी गति से आती है। इसी  कारण पश्चिम में समवर्षा रेखाएं पूर्वी भाग की अपेक्षा दूर-दूर है।

पश्चिमी राजस्थान में परिवर्तिता सर्वाधिक है (40 से 70 प्रतिशत) जबकि दक्षिण राजस्थान में वर्षा की परिवर्तिता सबसे कम (20 प्रतिशत तक) है।

राजस्थान में वर्षा का समय और मात्रा तो अनिश्चित है, साथ में इसका वितरण भी असमान है।

अरब सागरीय मानसूनी हवाओं से राजस्थान के दक्षिणी जिलों में तो पर्याप्त वर्षा हो जाती है, शेष राजस्थान में क्यों नहीं ? - क्योंकि अरावली पर्वतमाला इन हवाओं के समानान्तर दिशा में होने के कारण अवरोध का कार्य नहीं कर पाती है।

बंगाल की खाड़ी व अरब सागर दोनेां से उठे मानसून की अधिकाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला राजस्थान का भाग/जिले - दक्षिण-पश्चिमी भाग (सिरोही व जालोर)

मावठ/शीतकाल में वर्षा राजस्थान के उतर-पश्चिमी भाग में सर्वाधिक होती है।

राजस्थान के किस भाग में सर्वाधिक वर्षा होती है - दक्षिण राजस्थान में

राजस्थान के किस जिले में औसत वर्षा सबसे अधिक होती है - झालावाड

पश्चिमी शुष्क मैदान व अर्द्धशुष्क मैदान को विभाजित करने वाली रेखा है - 25 सेमी

राजस्थान के किस जिले में वार्षिक वर्षा में विषमता का प्रतिशत सर्वाधिक है - जैसलमेर

राजस्थान के किस जिले में वार्षिक वर्षा के वितरण में सर्वाधिक असामनता है - बाड़मेर

किस दिशा में राजस्थान में वर्षा की मात्रा में वृद्धि होती है - उतर-पश्चिम से दक्षिण पूर्व व उतर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम

किस दिशा में राजस्थान में वर्षा की मात्रा में कमी होती है - दक्षिण-पूर्व से उतर-पश्चिम व दक्षिण-पश्चिम से उतर-पूर्व की ओर

वर्षा की मात्रा के आधार पर राजस्थान में मुख्य रूप से 4 जलवायु प्रदेश है - शुष्क, अर्द्धशुष्क, आर्द्र व उप आर्द्र

राजस्थान में सर्दियों में होने वाली वर्षा मुख्यतः किन हवाओं से होती है - उतर-पश्चिमी हवाओं से

राजस्थान का कौनसा भाग अरब सागर से उठे मानसून से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करता है - दक्षिण-पश्चिमी भाग

राजस्थान की लगभग 90 प्रतिशत वर्षा किस मानसूनी हवाओं से होती है - दक्षिण-पश्मि मानसून

बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं को राजस्थान की स्थानीय भाषा में क्या कहते हैं - पुरवइआ (परवाई)

राजस्थान में सर्वप्रथम किस मानसून की शाखा का प्रवेश होता है - अरब सागर की शाखा (क्येांकि अरब सागर से राजस्थान की दक्षिण-पश्चिमी सीमा केवल 400 किमी दूर है।)

राजस्थान में अरब-सागरीय मानसून का प्रवेश राज्य की किस सीमा से होता है - दक्षिण-पश्चिमी

राजस्थान का चेरापूंजी - झालावाड़

राजस्थान में मानसून सबसे अंत में प्रवेश करता है तथा सबसे पहले वापस चला जाता है। (शेष उतरी भारत की अपेक्षा) 

राजस्थान के पूर्वी जिलों में उपलब्ध सतही जल राजस्थान के कुल सतही जल का 80 प्रतिशत से भी अधिक है।

राजस्थान में भारत के कुल जल संसाधनों का मात्र 1 प्रतिशत जल उपलब्ध है।

राजस्थान के दक्षिण भाग में विशेषकर संपूर्ण बांसवाड़ा व सिरोही जिले के पहाड़ी भागों में अधिशेष जल की मात्रा प्रतिवर्ष 30 सेमी से अधिक है जो राज्य में सर्वाधिक है।

राजस्थान के उतरी व पश्चिमी भागों में अधिशेष जल की मात्रा नगण्य है।

राजस्थान में संभावित वाष्प-वाष्पोत्सर्जन की वार्षिक दर सबसे अधिक जैसलमेर में व सबसे कम डूंगरपुर-बांसवाड़ा में है।

विद्यमान जलवायवीय दशाओं और कृषिगत उत्पादनों के आधार पर राजस्थान को दस कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभक्त किया गया है।

सबसे शुष्क कृषि जलवायु क्षेत्र - शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र

सर्वाधिक कृषि उत्पादन (अन्न भंडार) वाला कृषि जलवायु क्षेत्र - सिंचित उतरी-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र

क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा कृषि जलवायु क्षेत्र - शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र

क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा कृषि जलवायु क्षेत्र - आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र (माही नदी क्षेत्र)

चंबल नदी क्षेत्र में स्थित कृषि जलवायु क्षेत्र जो उपजाउ काली मिटी के कारण राजस्थान का प्रमुख कृषि जलवायु क्षेत्र है - आर्द्र 

दक्षिण-पूर्वी मैदानी क्षेत्र राजस्थान का अति आर्द्र प्रदेश क्षेत्र है - बारां-झालावाड़-बांसवाड़ा-द.पू.कोटा व मा. आबू

राजस्थान में सर्वाधिक आर्द्रता किस माह में रहती है - अगस्त

➲ राजस्थान में सबसे कम आर्द्रता किस माह में रहती है - अप्रेल

वार्षिक वर्षा की प्रतिशत मात्रा में सर्वाधिक उतार-चढाव वाला जिला - जैसलमेर

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