Thursday, 16 February 2012

जिलानुसार राजस्थान की नदियां

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जिला
प्रवाहित होने वाली नदियां
अजमेर
सागरमती, सरस्वती, खारी, डाई, बनास
अलवर
साबी, रूपारेल, काली, गौरी, सोटा
उदयपुर
बनास, बेड़च, वाकल, सोम, जाखम, साबरमती
कोटा
चम्बल, काली, सिंध, पार्वती, आउ, नवेजा, परबन
गंगानगर
घग्घर
चित्तौड़गढ़
बनास, बेड़च, बामणी, बागली, बागन, औराई, गम्भीरी, सीबना, जाखम, माही
चूरू
कोई नदी नहीं
जयपुर
बाणगंगा, बांडी, ढूंढ, मोरेल, साबी, डाई, सखा, माशी
जालौर
लूनी, बांडी, जवाई, सूकड़ी
जैसलमेर
काकनेय, लाठी, चांघण, धडआ, धोगड़ी
जोधपुर
लूनी, माठड़ी, जोजरी
झालावाड़
कालीसिंध, पार्वती, छोटी कालीसिंध, निववाज
झुंझुनू
कांतली
टोंक
बनास, माशी, बांडी
डूंगरपुर
सोम, माही, सोनी
नागौर
लूनी
पाली
लीलड़ी, बांडी, सूकड़ी, जवाई
बाड़मेर
लूनी, सूकड़ी
बांसवाड़ा
माही, अन्नास, चैनी
बीकानेर
कोई नदी नहीं
बूंदी
कुराल
भरतपुर
चम्बल, बरहा, बाणगंगा, गंभीरी, पार्वती
भीलवाड़ा
बनास, कोठारी, बेड़च, मेनाली, मानसी, खारी
सवाई माधोपुर
चम्बल, बनास, मोरेल
सिरोही
पं. बनास, सूकड़ी, पोसालिया, खाती, खिशनावती, भूला और सुखदा
सीकर
कान्तली, मन्था, पावटा, कावंत
धौलपुर
चम्बल
दौसा
मोरेल, बाणगंगा
बारां
पार्वती, कुकू, परवान
राजसमंद
बनास, चंद्रभागा, खारी

2 comments:

  1. मैं जयपुर जिले के ग्राम मैड, श्री सियावर जी मंदिर के महंत श्री गणेश दास जी का पुत्र हूँ . मेरा बाल्यकाल बाणगंगा नदी के जंगल में बीता तब मुझे प्रक्रति को नजदीक से देखने का सौभाग्य मिला. आगे चलकर साहित्य, संगीत एवम कला से नाता जुड़ा. बैंक सेवा में रहकर हिंदी साहित्य में प़ी. एच .डी व डी. लिट. किया. साहित्य सर्जन में भी कुछ किया . मेरे लिखे १२६ dhundhari गीतों पर प़ी. एच .डी का काम हुआ एवम रांची विश्वविद्यालय में भी प़ी. एच .डी का शोध चल रहा है . मेरी पुस्तक 'मेरे गीत दिखाएँ गाँव ' प्रकाशन के लिए तैयार है. यदि कोई हमारी संस्कृति एवम परम्परा का पुजारी इसके प्रकाशन में सहयोग करे तो इससे हमारी संस्कृति एवम परम्परा की सही तस्वीर जनसामान्य के समक्ष उजागर हो सकती है .
    विनीत
    डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा
    मोबाइल ०८६०००४३०६६
    ए मेल trivenikalasangam@gmail.com

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