Friday, 9 September 2011

दारू दाखां रौ, उजाडै घर लाखां रौ

पन्नालाल कटारिया 'बिठौड़ा''
पेमो बरस अठारो रौ स्याणौ मोट्यार, लांठै डील रौ धणी। बो पोसाल मांय केई बरस तांई गोता खाया पर नीठेक पांचेक किताब पढ़ियौ। इणसूं बैसी सुरसत माता रौ बास उणरै हिरदै नी व्है सकियौ हो। बो नजीक सैर मांय केई दिन तो गतोल  ाखावतौ रह्यौ थेवट बींनै एक फैक्ट्री मांय काम मिलगौ। बो लगन सूं काम करण लागौ। पेमो काण करण नै अबहूज हो। बो सेठ रौ भुलायो काम घणै चाव अर ईमान सूं करतौ हो। पेमा री लगन नै देख सेठ घणौ लाड राखतौ। म्हीनै री बगार दूजां मजूरां सूं उणनै कीं बैसी देवतौ क्यूंकि बो सिंझ्या तांई भुलायौ काम पूरौ करियां पछै घरां जावतो।


पेमा रा काम धंधौ अर इमानदारी नै देखतां थकां बैगोई ज उणरौ सगपण व्हैगो अर बखत पाण ब्याव व्हैगो। पेमो अर उणरी जोड़ायत गीता घणै हेत अर मौज सूं रेवण लागा। पेमो कमाई खूब करै। गीता घरां बैठी मौज करै अर आपरा कमाऊ धणी रा बखाण करती नी थाकै। बास गवाडी अर गांव मांय पेमा रौ धणौ मांन। कमाऊ पूत किणनै खारौ लागै। घर में कमावै अर जग मांय सरावै।


बखत परवाणै पेमा रै दो तीनेक टाबर पण व्हैगा। अबै पेमा रै घर रौ खरच कीं बधगौ हो। बठीनै पेमो साथै काम करणिया दूजा मजूरां री सौबत में लागगो। आ कहावत जग चावी है कि कालिया भेलौ धोलियौ बंधे तो गुण नीं तो लखण तो लेवै इज। पेमो सौबत रै पांण दारू पीवण ढूकगौ। अबै तो सिंझ्या पछै रात पड्यां घरां आवै अर दारू रै अणूतै नरै में हिंडा हिंडतौ आवै। कदै खाली मांय पग पड़ जावैओ। कदै अणूता नसा में मारग में ई पड़ जावै। कुतिया भुसै। कदै उणरौ मूंडौ पण चाटण लाग जावै। कदै माथै मूत जेवै। गिंडक उमरा पूर फाड़ देवै।

घरै गीता धणी री उडीक में रात तांई अणमणी अर भूखी बैठी रैवै। 


एक दिन पेमो अणूता नसा में हिंडा हिंडतो घरे पूगो। किंवाड़ रै भचीड़ मेल्यो। बारणौ खोल..अरे..बरणौ नी खोले कांई..?

गीता नारसर बारणा री आगल खोली। पेमो तो तेस में आय खाली बोतल री गीता रै माथा ठोकी। बोतल गीता रै माथा पर फूटगी अर माथा सूं लौही री गंगा उफणण लागी। गीता तो  ्‌णचेतै बारण रै बिचालै ई पड़ीग। गीता रै माथा सूं लौही री धार देखतां ई पेमा रो नसौ एकाएक जीरो डिगरी माथै आयगौ।

आडोसी पाडौसी जद गीता नै कुरलावती सुणी तो उणरै घर कांनी दौड़या अर गाड़ी मंगाय उणने सफाखाने ले जावण री जुगत करी। पेमो ओ सगलो नजारौ फाटी आंख्यां सूं देखतो रह गयो। इण अबकी पल मांय टको एक पण घर मांय नीं हो। सगली कमाई दारू में गमाय देतो।

पेमा रा टाबर मां ने लौही सूं रगाबग देख जोर सूं रोवण लागा। 


पेमा घर री फोरी हालत नै देख अड़ौसी पड़ौती थोड़ा थोड़ा पईसा भेला कर गीता रौ ईलाज करायौ। पेमो बारणा रै बारै ई पडगौ रै बारै ई पड़गौ हो अर वछै ई नींद आयगी।

इतरौ फोड़ो पड़ता ई पेमा री बाण नी छूटी अर बो ईयां ई धुत रैवतौ। अबै बो मीना मांय आठ दस दिन नीठ काम माथै आवतो अर जितरौ कमावतो दारू में उडावतौ।

फैक्ट्री रौ सेठ पेमा नै धणौ पालतौ पर पेमो दारू री बाण नीं छोडी। दारू री ऊंदी बाण नै देखतां सेठ पेमा ने फैक्ट्री सूं बारै काढ दियौ। अबै बो गलियां गलियां रूकतौ फिरै। उणनै कुण ई मूंडै नीं लगावै।

पेमा री जोड़ायत गीता जो घर धणी री कमाई पाण मौज करती, अबै बा डील माथै फाड्यो पूरा बिटोलै। रूखी सूखी खावै। टाबर नै भणावण रा मनसोबा तो समंदरा पार रहगा। मेलावा रौ पेट भरणो बीरै खातर ओखौ व्हेगो।
गीता पेट रै खातर गांव मांय दस पंदरे रिपियां री दैनकी करण लागी। बठीने पेमो गीता री कमाई रा पईसा धिगाणै गीता सूं झपटर ले लेवतो अर दारू पीवतो। पईसा नीं देवौ रोजीना घर में कलौ अर धापा मुकी करतौ अर बापड़ी अबला नै सोटा खावण पड़ता।

जद बा भाटा सूं काठी व्हैगी। गीता आपरै कालजा माथै भाटौ बांध नै टाबरां नै इण दुनयि मांय भगवान भरोसै छोड कुवै मांय कूदर आतमघात कर दी।

इण बखत पेमा रौ दारू फेरूं उतरगो। बो गीता सरूं घणौ रोयो पर गियोड़ी चीजां पाछी नीं बावड़ै, आ पेमा नै ठाह ही पण ओजूं उणरी दारू आली बाण नी छूटी। बो गीता रै गम में गैलो गूंगो व्हैगो अर बैसी पवण लागगौ।
छेवट पेमो पण इण दुनिया मांय घणा दिन नीं जीव सक्यौ अर बो एक दिन दारू रा अणूता नसा में रेलगाड़ी रै अंजण सूं कटनै पिराण गमाय दिया।

पेमा रा टाबर रूलगा। ऊपर आभै हेठौ धरती। इणरै सिवा उणरा आंसूड़ा पूंछण आलौ कांई कोनी हो। इंया सगला गांव रा इण कोजी बाण नै दोस देवै हो। ओ दारू पेमा रौ भरियो तरियौ घर उजाड़ दियौ। कैवण में तो घ्दारू दाखां रो पण ओ घर उजाड़े लाखां रौ।

गांव रौ सिरपंच अर पटवारी दोन्यूं मिल राज री ईमदाद सारू टाबरां नै बालगृह ले जाय भरती कराय दिया।


टाबरां रै रोटी रा फोड़ पड़गा। सगलां रै मूंडै सूं एक ई बात ही के ओ दारू आं टाबरां नै कठै रां ई नीं राख्या घ्न धर रा अर अर ना घाट राङ ।

बीं दिन सूं जद सूं पेमा रो घर उजड़ियो, गांव रा बूढा बडेरा अर मोट्यार जिणां नै दारू पीवण री बाण ही, बीं दिन सूं दारू नी पीवण री सौगन ले लीवी। चौवटा मांय बैठ सगलां हाथां में गंगाजली लेय गांव मांय दारू माथै पूरी पाबंदी लगाय दी। आप री खरी कमाई रा पईसा चोखा काम में  लगावण लागा। गांव मांय फेरूं की मांड़ी बात नी सुणीजी। अबै पेमा रौ गांव एक आदर्श गांव रै नांव सू जाणीजै।

No comments:

Post a Comment