Friday, 9 September 2011

हेलजी अपणायत

विकास। ऐम.ए. री लांठी डिगरी लयर मन ई मन हरखे हो। उणरे मुंडा रो नूर वीं बगत फीको पडगो जद बो नौकरड़ी सारू सड़कां माथो रूलतो फिरतौ। उणरो मनसूबो पूरो नीं व्हियो। नौकरी री जुगत नीं बैठी तो आठ दसेक टिगरियां ने ट्यूशन पढ़ावण लागो। उणरी लग रे पाण पढ़ेसरियां रो बधापो व्हैवण लागो। इयां अजै बो हार को मानी ही नी नौकरी खातर दोयक वला फेरू इम्तीहान पण दिना हा पर जोग नीं जमियो। ट्यूशन रे पाण गुजारो करै।

एक दिन बो स्हैर में नौकरी रो इम्तीहान देवे हो। उमरे लारली टेबल माथे एक छोरी पण भेली इम्तीहान देवे ही। इम्तीहान री टैम पूरो व्हियो सगला आप आप रे ठाणै कांनी जावण लागा। बा छोरी कनै ऊभी ही, पूछ्यो थारो नांव? विकास नांव है म्हारो । थारो...? विकास पूछ्यो..वीणा। हवले हवले हथाई बधती रही और दोन्यूं सागी टैक्सी मांय बेसर रेल टेसण पूगा। वीणा फूटरी फररी, गौरी गट, कमर तांई लटकती काली चोटी, भरियौ डील पण मुंडा माथे कीं उदासी वापरियोड़ी ही।


बा चाणचक म्हारे माथे बिस्वास करती थकी कह्यो म्हनै थारी ईमददा री दरकार है, कर सकतो तो..? विकास भवजाल में पजगो खुद बेरूजगार इणरी कांई इमदाद करेला..थने ठाह  ै म्हैं पण रूजगार सारू इने बिने डुलतो फिरूं हूं अर थारी..विकास संकतो थको बोल्यो। बा पूरा विश्वास रे सागे कह्यो-था म्हारी इमदाद कर सको हो..हमारी तो भरो-वीणा कह्यो।

उणरा (वीणा रा) आतम विस्वास रे देखता मन मांय घड़े अर भांगे पण कीं गतामग नीं पड़ी..। फेरूं विकास बोल्यो..म्हैं थारी कांई ईमदाद कर सकूं जे कर सक्यो तो धिन भाग म्हारा।

एक अणजाण मोट्यार छोरी इण भांत गले पड़े अर ईमदाद मांगे तो स्यात् इणने कीं दरकार अवस है। बो मन ई मन बिचारे अर माथो ठणकावतौ हामल भरी।

बो बोली म्है बी.एड. तक री भणा ई किदी हूं गर म्हनै थारो सेड़ो मिले तो आपां दोन्यूं किणी स्हैर मांय प्राइवेट पोसाल खोल लेवा अर आपरो रूजगार बणाय लेवां..। विकास तो वीणा रो मुंडो ताकतो रहगो जाणे घर बैठा गंगा मिलगी व्है।

विकास थोड़ो खूल्यो अर कैवण लागो वीणा ईयां म्है पण ट्यूशन सूं इज गुजारो करूं हूं। हथाई हथाई में टैसण आयगदो  दोन्यूं कीं सिरावण पाणी लियओ अर रेल मांय बैठा..विकास उणनै पूछयो वीणा इयां थूं रैवे कठै है? थूं कुंवारी है कै परणियोड़ी..। वीणा मुलकती थकी कीं पड़ूतर नीं दियौ अर टालो कर दियो। उणरा टाला ने देखतां बात नीं बधाई अर मन मसोसर रहगो।

रेल धनधनाट करती चीला माथे दौड़ती दौड़ती साग टेसण पूगी। विकास वीणा ने साथे लेयर घरां पूगो मां अर बापू ने वीणा री ओलखाण कराई तो वे उणने राखण सारू राजी व्हैगा। पोसालण खोलण सारू तीन चारेक दिनां तांई घर री भाल में पूरा स्हैर छाण दियो जद जायर कठै एक घर मिलियो। घर मिलोय तो बो भी ठावको अर बस्ती जठै सगला वौपारी कै नौकरी आला। घर रो घणी परदेश वौपार में लाग्योडटो। कुंची पड़ौसी ने सूंप्योड़ी ही कानाबाती सूं सेठ राजी व्हैगी हो। गिणिया दिनां ईज पोसाल रौ नांव सैर मांय चावौ व्हैगो। वीणा पोसाल री हेडमास्टरणी ही। व्यवस्था रौ सगलो काम विकास देखण लागो। उणारी आमद में गौरो बधापो व्हैवण लागो।
ईतवार रो दिन हो। वीणा सवार रा अखबार पढ़े ही। विकास पण उणरै नैड़ो बैठो हो, बो वीणा रा बखाण करतो नीं थाके हो पण घणकरा सवाण उणरा मगज मांय  ुछाला ले रीया हा। वो सेवट पूछ लियो वीणा थूं इण भांत एकली कितरा दिनां तांई दिन गुजारेला थारो की ठांणो..? एकली कठै हूं थां हो नीं अर खिन खिन कर हंसण लागी।

म्हैं कुण हूं, कठै रैवती ही अर कांई करती ही, इण बातां में म्हनै घणौ चाव कोनी। पण अबै कुण हूं, कठै रैवूं हूं, कठै रैवूं हूं, कांई करूं हूं? इण बातां में म्हनै बैसी विस्वास है। पण थां म्हनै बीसूं वेला पूछ लियो इण खातर विगत थांने बताय दूं इणसूं थांने एड़ोनी लागै कै किणरो संगर कर लियो। वीणा पूरा विस्वास सूं कह्यो।

गांव रो नांव थाने पैली बताय दियो बठै म्हारा बापू एक पोसाल रा मास्टर हा। म्हनै घणै लाड़ां कोडां मोटी किदी, इंया मां तोम्‌हनै नैनी थकी (बालपण) ने छोड़ सुरग सिधायगी ही। म्हैं म्हारै बापू री इकलौती औलाद ही इण सारू म्हारा बापू आस करता के म्हनै खातो पीतो घर मिलै अर लाडा कोडा ब्याव व्है। इण सारू नौकरी री पूरी कमाई भेली कर म्हरो ब्याव एक गांव मांय कर दियो अर बे पण म्हनै छोड़ दुनिया सूं जाता रह्या। दायजा रा लोभी म्हारे सासरा आला म्हारे माथे बैजा जुलम कर लागा अर ऐक दिन ऐड़ो आयो कै बै म्हनै घासलेट ढोल होली सुलगावण लागगा। कुदरत के ऊपर आला रा म्हनै थोड़ो भान व्हैगो हो, सासु जियां ई पीपी रो ठकणो खोल्यो, म्हैं दौड़र बारणा बारे आयगी अर न्हाटी न्हाटी म्हारी भुआ रै घरमां जको उण इज गांव मांय मील डोडेक अलगी रैवे ही।

दूजै दिनूसं नौकरी री भाल में निकलगी अर था सूं मिली। वीणा दुखडो गिणाती गी। सगली दुःख री सुनी तो विका रा कानडा मांय आयगा। सगली विगत मन लगार सुणी अर बोल्यो वीणा अबै थूं एकली कोनी। थारी हरेक भीड़ में थारे सागे हूं अर थूं चावै तो आंपा..। इण माथै वीणा कैवण लागी। विकास थे म्हनै इतरी हेजली अपणायत दिनी। म्हैं पण थारे सूं इज हेजली अपणायत राखूं अर थारे सागै जिनगाणी बितावण सारू त्यार हूं। दोनूं राजी बाजी प्रेम ब्याव कर लियो।

No comments:

Post a Comment