Saturday, 10 September 2011

रामू रो बछेरियो

रामू रे छोरा छोरी नीं हा। उणरै कनै फखत एक बछेरियो (गधेड़ी रो बच्चो) हो। घणो फुटरो रंग अर आंख उणयारे। रामू अर उणरी जोड़ायत बछेरा रो घणो लाड़ राखे। उणने ई'ज आपरो बेटो माने। बछेरियो आंगणां मांय उछल कूद करै अर आपरा धणी धिणियारी रे आले दौले फिरै।  

रामू ऐक दिन इस्कूल रै कनै बैठ्यो-गांव रा छोरा छोरियां ने इस्कूल जाता देख्यो तो उणरै मन मां उंडो विचार आयो घ्क्यूं नीं म्हैं पण म्हारा बछेरिया ने इस्कूल मेलूं।'विचार करतो करतो घरां पूगौ अर मन री बात लुगाई सूं कही। लुगाईने पण आ बात सोलह आना जंचगी। 

दूजै दिन सवार रा रामू बछेरिया ने लेय मूरी पकड्या इस्कूल पूगौ। बछेरिया ने फलसा रे बांध्यौ अर माटङसाब रै कनै जाय राम राम कियना अर कैवण लागौ-घ्माट'साब म्हारौ ओ बछेरियो म्हारै वास्तै बेटै सूं कीं कम कोनी। आप इणरो नांव इस्कूल मांय मांडो। थांरी फीस व्है जो म्हरै सूं लै लियो।'

माङसाब बोल्या-घ्भई रामू। म्है इणरो नांव मांड देस्यूं, बारै महीने री मण बाजरी देतो रहिजै।'ठीक सा। थारै आ मण बाजरी पक्क्यात समझो, पण भणाई पढ़ाई में फरक नीं आवणी चाईजै रामू भुलावण देतो थको बोल्यो। 

अरे! रामू इणने गधैड़े सूं मिनखी नीं बणाय देवूं तो म्हारो नांव भी मास्टर ठोटीमल नी।'माङट साब छाती ठोक'र बोल्यो। 

अबै रामू नेम सर बछेरिया नै इस्कूल रै फलसा रै बांध घरां आय जावै। इस्कूल री छुट्टी व्है जद माटङसाब बछेरिया रै एक पाटी लटकाय देवे इण पर दो चार मोटा मोटा आखर मांड देवै। काम नेम सर होवम लागो। बछेरिया घरां जद कदै...चिक..भौ..चिक..भौ...चालू करे तो दोन्यू धणी लुगाई घणा राजी व्है, घ्देख बढभागण बछेरिया आखर बांच रह्यो है, आधो निमख तो बणग्यौ लागै?'राम जोड़ायत नै केवे। 

जोग री बात मिनौ डेढेक हुयौ के बछेरिया ने बटाऊ ताको राख'र आपरै डेरा मांय भेलौ कर जाता रह्या। माटङसाब फलसा कानी देखौ तो बछेरियो निजर नी आयो। माटङसाब करे पण कांई? उलूजाड़ में पड़गा। मन में विचरौ, घ्रामू ने कांई पडूतर देस्यूं? 'फेरूं मन मांय कीं उंडौ विचार करियो, जितैङक बछेरिया ने घरां नी पूगतो देख रामू स्कूल कानी दौड़त थको माटङसाब साब ने ढाब्या। बोल्यो, घ्माटङसाब सगला छोरा छोरियां ने घरां जाता देख्या। म्हारो बछेरियो औजूं नी पूगौ।'

माटङसाब साब की हंसता थका बोल्यो, घ्अरे रामू, थूं अजै तांई उणनै बछेरियो इज गिणै। बो तो मिनख बणगो..मिनख..। है, 'सांचणी..रामू घणौ राजी व्हीयौ अर बोल्यो है बो? बो तो जोधपुर सैर मांय लांठो अफसर बण्यो है। माटङसाब कह्यो। आछो सा, भगवान थांरौ भलो करै। रामू राजी राजी घरां पूग्यौ, लुगाई ने सगली बात बताई। लुगाण पण घणी राजी व्ही।

जोधपुर स्हैर जावण नै उतावणो रामू लगु ाई सूं भाड़ा री जोड़ जगत सारू कह्यो। घ्पईसा टका तो घर मांय है कोनी। बाजरी मण च्यारेक पड़ी है, जो भाड़ा जोगी लेय जावौ।'रामू री लुगाई रामू सूं कह्यो। 

आछो। रामू गमछा में बाजरी री गांठ बांधी अर माथा माथै मेल हाथ में मुरी, सटियो अर तुसां री पोटली लेय राजी राजी रैल टेसण कांनी व्हीर व्हैगो। रामू खाथौ खाथौ टेसण पूग्यो। रामू रै रेल टेसण देखण रौ काम पैली बार पड़ियौ हो। मुसाफिर खाना री एक कुरसी माथै बैसगो। ईनै बीनै देखै अर ताका झांका करे। 

रामूनै ईया बैठ्यौ देख एक भणियौ पढ़ियौ मोट्यार रामू सकूं पूछ्यौ घ्कहां जायेगा भाई।'घ्जोधपुर रा अफसर कनै'राम बोल्यो मोट्यार नै समझतां जैज नीं लागी, बो जाणगौ के इ ै जोधपुर जावणौ है। 

तू ऐसा कर सामने जो खिड़की दिख रही है, वहा ँ से टिकट लेकर फिर उस तरफ काले ईजन वाली धुंआ निकलाती हुई गाड़ी आयेगी, झट से उसमे चढ जाना।'मोट्यार आंगली सूं सैण करतौ थको बोल्यौ। 

रामू टिगट खिड़की रै सांमी जाय उभगौ। मांय एक टोपधारी मिनख टिगट बांटै हो, चित लगार देखण लागौ। रामू री बारी आई तो रामू बाजरी री गांठ खिड़की रे सामी मेल दी। टिगट बाबू देखतो रहग्यौ, रिसां बलतौ थकौ अबै यह कह्या है? कहां जाना है तुझै? पैसे निकाल'टिगट बाबु बोल्यौ। 

म्हारै कनै पईसा टका कोनी। म्हनै जाणो जोधुपर। म्हैं ल्यायौ बाजरी री गांठ। थारौ माथा उपरलौ ठाठियो (टोप) नीचो मेल राम झटझट टिगर बाबू रै सवालां रौ वडूतर देतो थको बोल्यो। 

अबै गंवार कहीं के। यहां बाजरी नहीं ली जाती है। टिगट बाबू फेरूं चिढ़ियौ। 

रामू तो टिगट बाबू रै चींचड़ा री जयां चिपगो। टिगट बापू आखिर तंग व्है टोप उतारियो अर रामू रै सामी राख्यौ। 

रामू तो झररर..बाजरी गांठ टोप मांय खाली कर दी अर कीं राख दी। टिगट बापू माथो ठणकतो थको जोधपुर रो टिगट रामू रे हाथ में झिलायौ। 

टिगत हाथ में लेय रामू चीला कानी निजर न्हाखी। सिंझ्या लटैटगै सवा नव बजया हा। 

अलगौ सी एक मिनख काला गाभा (कोट पेंट) पैरयां हाथ में सिगरेट, मूंडै सूं धुंआ रा गोठ उडावतौ थको चीलरां रै बीचालै आवतौ निजर आयो (बो रेले रौ पैठवान हो) 

रामू री आंख्यां मांय कीं चिमक वापरी बो मन मांय राजी व्हीयो, घ्आई रेल। इणनै नी झाली तो हाथा सूं जाती रैसी। फेरूं दूजी ठाह नीं कदै आसी?'

रामू तो ताको राखर ऊभो हो। पैठवान चीलां रै बिचालै बिचालै हाथ में लालटेण अर मुंहडा में सूं धुंआ रा गोठ उडावतो थको राम रै नेड़ै आया पूछ्यो, कहां जाना है तुझे? रामू तो ताको राखर चढ़गो बीरै घोड़े पलाण। फेरू बोल्यो जोधपुर जावणौ है।

पैठवान तो हाबाकियो व्हैगो बोल्यो, यह क्या बदमतीजी है? रेल रौ टिगट है म्हारै कनै। रामू छाती ताणर बोल्यो। अबै। नीचे उतर। पैठवान कड़कर बोल्यौ। ठाठियो भरर बाजारी दीनी है, रामू फेरू बोल्यौ।

अबै क्या बक रहा है? पेठवान फेरूं कड़कियौ। बकरो कोनी गधेड़ी है, रामू पडूतर देतौ थको बोल्यौ।

अबै नीचे उत्तर..नीचे उत्तर..पैठवान जोर सूं हाका हूक मांड्या।

दो तीनेक बडाऊ दौड़र आया रामू नै हेठौ उतारियो अर कीं भुलावण घाथी। थोड़ी ताल में सूं रेल छुक..छुक..करती धुंआ रा गोठ उडावती प्लेट फार्म माथै पूगी। रामू तो आवती रै ई झांप घातर डब्बा रै उचालै चढ़गौ। रामू नै इंया उचालै चढ्यो देख रेलवे रा दोयेक नौकर चाकर आया अर बीनै सावल बैठायो। रामू ने कीं बात दाय नी आई तो बो छानो मानो गलियारा बीचालै बैसगो।

गार्ड बाबू सिटि बजाई अर हरी झंडी बतावतां रेल व्हीर व्हैगी।

रेल चीला माथै सरपट दौड़ण लागी। गाड़ी रा हिचकोला सूं रामू ने मीठी मीठी नींद आयगी। रे जोधपुर टेसण पूगतां ही प्लेटफार्म माथै मिनखां रौ हियो हियो लाग्योड़ौ। सगला जोधपुर..जोधपुर करता करता आप आप रा बींटा संभाल्या।

रामू नै पण जगायो भई, उठ देसण आयगो। रामू झट व्हीर व्हैगो दूजा मिनखां रे देख देख टिगट बाबू ने टिगट झेलाया, गेठ सूं बारै निसरियौ। बारै गांडियां री जमघट अर मानखा री हियो हियो देख रामू तो जाणै डाफाचूक व्हैगो। फेरूं एक तांगा आला रै नेड़ै सी जाय मोटा अफसर कनै पूगावण रौ कह्यो। रामू तांगा माथै सवार व्है गलियां मांय गोता खावै।

तांगा आला नै कीं गतागम नी पड़ी तो बो रामू नै एक दफ्तर रै कनै उतार दियो। तागां आला रौ भाड़ो कीं बाजरी बीरै कनै बच्योड़ी ही दे दीनी।

रामू गेट रै नेड़ौ पूगो तो चोकीदार बीनै पाल दियो। किससे मिलना है? चौकीदार रोब सूं बोल्यो।

मोटा अफसर रौ बापू हू अर उण सूं इज मिलणौ हे। रामू पडूतर दियौ।

चौकीदार कीं संकियौ अर बल्ला गलै नी लेवण में चौखौ मान्यौ। रामू नै छूट दे दीनी।

दफ्तर मांय बड़ बारणा रै कनै थलैटी माथै उभ रामू चारूं कानी नजिर न्हाखी अर करड़ौ धज्ज व्हा सगला रै माथै विडियो कैमरा रै जिंया निजर न्हाखी।

रामू मन में विचारियो ईंया कां ी ठाह लागसी आपां आलौ कुणसौ है? बीनै बात याद आयगी के तुस री पोटली बताया ठा लागसी। बो तुस री पोटली ऊंची कर सगला सामी सैण करण लागौ। दफ्तर रा सगला नौकर रामू नै आंख्या रा डोला काढ काढ देखण लागगा, क्यूंक नजारो कीं अनोखौ हो।

जितै सी सामी साम ोटी कुरसी माथै बैठ्यौ एक जाड़ौ मातौ नौकर हाथ सूं सैण करी। बोई दफ्तर रो सै सूं मोटो अफसर हो। अफसर मन ई मन हरखै, मुरगी चोखी फसी। कीं माल ताल सांतरो लायो दिसै। लोभी जीवड़ौ मन ई मन घणौ राजी व्हियो। बो दफ्तर रा दूजा नौकरां नै पर्सनल बात रो कह थोड़ी ताल वास्तै बारै जावण रो हुकम दियौ। सगला अफसर रै हुकम नै अंगेज कर लियो अर बारै बैसगा।

अबै रामू अफसर रै नेड़ौ पूगो अर धोती री खोल्यां खोसर मींडका (डेडरिया) री नांई उछलर अफसर री कुरसी रै सामाला पाटा माथै चढगौ। अफसर री आंख्यां मांय आंख्या घाती, फेरू नाड़ ठणकी अर विचारियो घणो फेर फार तो निजर नी आवे। पर भणाई पढ़ाई सूं कीं फेर फार तो व्है ई है।

अफसर आंख्या माथै मोटो चस्मौ लगायां बठ्यौ रामू पण आंख्या फाड़ फाड़र देखे हो।

घ्म्हारै बिना पूछ्यां कियां आयोग?'रामू अफसर सूं कह्यो।

कह्या बकता है? काम की बात कर..कितना लाहा है? जिल्दी निकला दूसरे देख लेंगे। अफसर बोल्यो। अफसर कीं घूसखोर हो।

रामू रै कीं पल्लै नीं पड़ी..बो तो बोल्यो न चाल्यौ, ताकौ राखर नाड़ काठी झाली अर अर मुरी घातर दो च्यारेक जोर सूं सटीक मेल्या मोर तणा। म्हारै सूं लपलप..थारे खातर बारजी री कोठी खाली कर न्हाखी। रामू बापा बारै व्हैगो। अफसर रै मूंडै सूं फेफूंड अर आंख्यां रा डोला बारै आयगा, रामू बींनै साख्यात् जमदूत रौ रूप नजिर आवे हो।

अफसरो बोल्यो, थूं कांई चावै है म्हारा बाप। हां। अबै पूगौ नी ठाणै..। रामू नाड़ ठिणकतो थको बोल्यौ।

रिपिया चाईजै म्हनै..रिपिया।थारी तनख्वाह..। मरतौ कांई करतो..अफसर जेब सूं रिपिया री एक गिड्डी रामू रै हाथ में झेलाय दी अर विचारियो ई साटे ई पिराण तो बचिया।

रामू रिपिया री गिड्डि लेय पाछो गांव पूगो। गांव रा सगला मिनखां ने बीती बात बता ी तो लोगां आपरा छोरी छोरियां नै इस्कूल मेल्या ई विचार में के एक बछेरियो भणाई पढ़ाई सूं मिनख बण सकैतो ऐ टाबर तो देस रा मोटा सूं मोटा नेता अर अफसर अवस व्है सकेला।

रामू इण भांत आपरी अकल हुशियारी रै पाण आपरा गांव मांय पढ़ाई री नुंवी जोत जगाय दी।

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