Saturday, 10 September 2011

टीका रो दस्तूर

विभा रमती कूदती अर पढ़ती कद मोट्यार व्हैगी ठाह ई नीं पड़ी। साढी पांच फुट डिगी, भरिये गोल डील, फुटरी फर्ररी अर भणाई पढ़ाई में दूजा सूं दो पांवड़ा अगाड़ी। कॉलेज तक री पढ़ाई कर ली। विभा अबै परणावण जोग व्हैगी। तो मायता ने उणरे सगपण री चिता खावण लागी। पर बेटी ने सगपण सारू टीका रो दस्तूर करणो, ओ तलवार री धार पावंडा भरण सरीखो व्हैगो।  

केसव एक दफ्तर रो बाबू हो, ई खातर उणरी तनखा तो घर री दाल रोटी चलावण जोगी ही। केसव एक इमान री धार माथै चालणियो कारकून हो, इण खातर घूंस रै नांव माथै किण सूं ई एक पईसो लेवणो हराम ई मानतो। माथा पर लम्बी चोटी अर उणर ेचारेक गांठा उताउती दियोड़ी लिलड़ माथे चंदण री चारेक लकीरां अर उठतौ बैठतो मन मांय गुणगुणवातो रैवतो। 
केसव री नौकरी तिसके बरस रे लगै टगै व्हैगी ही पण अजै बो उण इज बडेरां रा कच्चा टापरा मांय मेलावा सागै दिनड़ा काटे हो। बास गवाड़ी रा मिनख केसव सूं कह्या करता, बाबूजी विभा सगपण जोग व्हैगी है। विभा तो घणी हुस्यार फुटरी फर्री है पर जिसो टीका रो दस्तूर हौसी बिसां ई घर अर वर मिल जासी। था तो राज रा चाकर हो अर बाबूजी हो थारे किसो बैरो..? केसव रै उणियरां रो रंग साव फीको पड़गो हो। रात दिन विभा रे सगपण री चिंता खवाण लागी। मन ई मन विचारै विभा सारू लांखां रिपिया रो टीका रौ दस्तूर कठै सूं निभा सूं? उणरै पछै दायजो फेरूं न्यारौ। 

पेटी रे खातर सगला लोन ले लीना अर जियां तियां टीका रो दस्तूर पूरो किनो पर छोरो मैट्रिक फेल, काम सूं बेकार, रूलेट न्मबर एक, गलियां मांय रूलतो फिरै। टीका रा दस्तूर में पचास हजार रिपिया रोकड़ा, एक मोटर सायकल, सोना री सवा तोला री बींटी-दस्तूर में भैला सगला सगा रे पांचू गाभा अर एक घड़ी री मांग, जीमण चोखी भांत रो काण कसर रह जावै तो सगपण टूटण रो डर। केसव सगला रे सामी हाथ जोड़ जोड़ उणरी आवभगत करै टीका रौ दस्तूर पूरौ व्हियौ। सगा ने राजी बाजी सीख दिरजी तो केसव रै जीव में जीव आयो। 

विभा तो सगपण मोटा धरमा में करण सारू टीका रो दस्तूर इणसूं चार पांती बत्तो व्है जद कछै इ थर्ड क्लास रौ नौकर मिलै पण ओ केसव खातर घमो दोरो हो। ब्याव टाणे मोटी होटल में जान रो डेरो। चोखी बांत रो जीमण सगला तामझाम अर दायजो न्यारो इतरो सगवड़ कठै सूं व्है। छोरी भला ई फुटरी फर्री पड में मांडे जिसी अर सांतरी भणी पढ़ी पर समाज में इणरो कोई मायनो नीं। समाज में वापरियोड़ी इण कोजी रीत रे पाण मन रा मंसूबा मन मांय रह जावे अर घुट घुट मर जांवे।

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