Friday, 9 September 2011

पराई बेटी

पन्नालाल कटारिया 'बिठौड़ा''
किरपासंकर रे घर मांय अर बारे मिनखां रो हियो हियो लाग्योड़ो, एक कांनी पुलिस री जीब ऊभी तो दूजै कांनी सफाखाना री ऐम्बूलैंस। धुंओ अजै थोड़ निकलै हो। आता जाता बटाऊपण ऐक दूजा ने पूंछै कांई व्हैगो भायला? आज किरपाजी रे घरां इतरा मिनख, पुलिस अर ऐम्बूलैंस कियां आया है। पण कि ने इ अजै पूरी विगत री जाणकारी नीं ही इण खातर माथा रा ठणका दैवे अर हाथ सूं सैण करै। स्यात बे आ कैवे के अजै म्हैनै ई ठाह कोनी, पण काना काचा व्हे, सुणीजी के किरपांसंकर री घरणाली दया आपरे बेटी री बीनणी शीतल ने घासलेट न्हाख बाल दी बतावे। जिनैते सफाखाना रा कारकून अर पुलिस आला एक धवला गाभां मायं विटोलियोड़ी शीतल ने ऐम्बूलेंस मांय घाली अर सफाखाने  ले गिया। बर्न वार्ड में खाट माथै एक जीवती लास सामी भालो तो डर लागै, कंचन जिसो डील आज हॉरर शौ रे पात्रां रे जिंया लगा रह्यो हो। नरख देता लोही आवतो एड़ी फुटरी फर्री ही शीतल।  

उणरो कसूंर कांई हो इण समाज ने ई स्यात ठाह कोनी व्हैला पण आज सगला गूंगा व्हैगा-कसूर फखत ओ के बा एक पराई बेटी है अर सोना रा ईण्डा देवण बाली कूकड़ी कोनी ही। शीतल रा बापू ऐक राज री पोसाल रा मास्टर हो। शीतल रै ब्याव खातर टैम पैली रजा लैली पूरी नौकरी री कमाई शीतल रै सासरा वाला ने दायजा में दे दिनी।
 
स्यात् इण खातर कै ऐका ऐक लाडेसर इणरे सासरा आला री आंख्या मांय नी खटकै पर लोभ ई किसो थोब व्है, बधतो ईज गियो। 

पण आज इण इज दायजा रे काणर लाडली सफाखाना मांय लास रे जिंया पड़ी। रोवे तो बूढा लाचार बाप रे नैना मांय नीर नी। खुड़िया रे अडखण सफाखाने व्हीर व्हियो। पर शीतल तो उणरा बूढापा में सफा गोड़ा भांग दिया हा। डोकरां ने अंधारी आयगी अर हेठो पड़गौ, सगला मिनखा दोड़या पर सियारो दैवण लागा पर होयेक हिचकी रे सागै इज गाबड़ ढलकाय दी। जिंया तियां सफाखाना मांय ले गिया। बर्न वार्ड रो कनलो वार्ड मेडिकल वार्ड हो सो मास्टडरजी ने भर्ती किया, थोड़ी तपास रै पछै डागदर हाथ झटक दिया। मास्टरजी जाता रह्या। 

किरपासंकर अर दया मास्टरजी रे देवलोक रा समिचार सुण मन ई मन घमा राजी व्हिया। बां रे ब्यान रो सोवणो मौको हो सो बां रा ब्याव हा भोजन बणावती ही गैस लिक व्हैगी। 

बठीनै शीतल मौत सूं झूंझ रही ही पर डागदरा री खासी जोड़ जुगत रै पछै शीतल ने की चैतो आयो। बा पाणी रो एक घूंट लियौ पर अजै ब्यटान चालू नीं व्हिया हा। अठीनै किरपाजी अर दया रो चेती चूकण लागगो। झ सियाला में दोन्यूं रे परेवा रा रैला आवण लागा। सासु सुसरा दोन्यूं शीतल ने हाथ जोड़ण लाग्या बेटी म्हैं थारा मायता हां, म्हारी जिनगाणी थारै हाथ में है। 

घड़ी चारेक रै टाल शीतल रा वाचा खुल्या। थाणेदारजी ब्यान लिया। ब्यान में सगली बिगत बताय दी, ब्यान रे मुजब किरपाजी अर दया नै जेल व्हैगी। अबपै शीतल एक मोटा स्हैर में रैवण लागी, बा लुगायां रै अत्याचार निवारण कमेटी रो गठन कियो। लुगायां सागै अत्याचार री बात माथै बा कुलै हिरदै सूं विरोध करण लागी। दायजा रूपी इण राकस ने जड़ मूल सूं गमावण री अपली करती रैवे।

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