दायजौ

अमरजी माट साब मिनखां रै जमघट में बोलतां छका कह्यो, साथियों। दहेज एक अभिशाप है। इक कुरीती को समाज से उखाड़ फेंकना है। सगला नुवां मोच्यार माट साब रे भासण माथै तालियां पर तालियां बजावै। अमरजी आखै चौखला मांय एक लूंठा समाज सुधार मानीजै। गांव-गांव समाज मांय वापरियोड़ी कोजी रीतां ने छोड़ण री भुलावण देवै। 

अमरजी कोई स्कूल में पढावण आला मासट्र नीं हौ, पण बै एम.ए. तांई भलिया पढ़ाई जरूर हा, इण खातर लोग बांनै लाड सू माटसाब इज कैवता। पूरै चौखलै में अमरजी माटङसाब नांव सूं चावा है। 

माटङसाब रै एका एक छोरी जमना। जमना कॉलेज में पढ़े। बा घणी फूटरी फर्री अर पढ़ाई में घणी हुस्यार। हुवै पछै क्यूं नीं उणरौ बापू अणूतौ भणियो पढ़ियों अर चौखलै चावौ समाज सुधारक मानीजै। जमना पण उणरै बापू री सीख आलै मारग चालै। 
जमना अबै मोट्यार व्हैगी, बा कॉलेज री पढाई पण पूरी करली। माटङसाबने जमना रै सगपण री चिंत खावण लागी। 

माटङसाब उणरा सिद्धांतां रै मुजब इसौ घर अर वर देखणौ चावै जो दायजा रो विरोध करै। 

पर माटङसाब ने ईसौ घर ओजूं मिलयो नीं। माटङसाब अबै समाज सुधार रा भासण देवणा बंद कर दिया। बै जमना रै सगपण खातर दायजा विरोधी घर अर वर भी भाल में फिरता फिरै। इयां करता करता एक दो बरस फेरूं निकलगा। 

माटङसाब घर मांय उदास बैठा कीं बिचारै हा कै म्हैं भाषण देवतो जद लोग कितरी तालियां बजावता अर म्हैं मानतो के म्हारी बात लोगां अंग्रेज कर ली। बै ऊंडा विचारा में डूबगा। 

उण इज बखत एक मोट्यार माट साब रे घरां आयो, माट साब सूं राम राम कर्या। 

बोल्यो माटङसाब म्हैं आपरी बेटी जमना रो हाथ मांगण सारू आयो हूं। माटङसाब एक टक सांमी देखण लागा। माटङसाब बोल्या-आप कांई करो हो अर आपरी पिछाण बतावो। 

म्हैं, विकास पंडित, म्हैं इण बरस इस डॉक्टरी पढ़ाई पूरी करर कॉलेस सूं आयौ हूं। थारै नजीक रै गांव रौ रेवासी हूं। 

जद तो थां म्हनै पण पिछाणता व्हौला। हां सां थारो नांव तो चौकले चावौ है। कोई हियाफूटो होसी जो नीं जाणै, विकास पडूतर देतो थको बोल्यो। 

जद तो थां आ पण जाणता व्होला कै म्हैं दायजा रो विरोधी हूं, माटङसाब बोल्या। विसाक माटङसाब री बात मंजूर करी। 

विका रा मां बाप उणरौ सगपण घणो दायजी देवण आला रै घरमां करण सारू कैवे। पण बो नीं मान्यो। विका मां बाप रै परबारो जमना सूं ब्याव कर लियौ।माटङसाब जमना रो घर बसाय नै घणा राजी हुया। अणूतो भार उतरगो माटङसाब रो। बठीनै विकास रा मां बाप बींयां रै परबारौ ब्याव करण रै कारण रीसां बल घर रा बारण मांय नीं बडण दियौ। जमना अर विकास दोन्यूं धणी लुगाई सासू सुसरा सूं न्यारा रेवण लागा। दोन्यूं घणा राजी अर सुख सूरैवे। 

जमना बारणा कनै उभी उणरै धणी विकास नै उडीकै ही। डाकियो गली मांय कागद बैंचतो थको जमना रै घर कनै आय कागद फरोलण लागो अर एक मोटो सो लिफाफो जमना रै हाथ में दियो। 

जमाना नांव ठिकाणो पढ़र देख्यो के लिफाफो डॉ. विकास रे नांव रो हो। वा लिफाफा ने खोलर देख्यो तो बा घणी राजी व्ही। बो उणरे धणी री नौकरी रो हुकम हो। विकास री अमेरिका मांय नौकरी लागगी। विकास जद घरां आयो तो पैली उणरो मूंडो मंगलेस ूसं मीठौ करायो अर पछै नौकरी रे हुकम (ऑडर) आलो लिफाफो हाथ में दियो। 

जमना आज घणी राजी है। माटङसाब ने जद विका रै नौकरी री ठाह पड़ी तो बै बठै आ ा, मीठो मुंहड़ो करावण सारू। माटङसाब पण घणा राजी के म्हारो जंवाई अमेरिका में लूंठो डॉक्टर मानीजैला अर म्हारी जमना राज करैला। 

विका कीं विचार में डूबगो, करै पण कांई। अबार बो जमना ने साथै नीं ले जाय सकै क्यूंकि हाल तांई नुंई नौकरी अर रैवण री सगवड़?

विकास मां अर बापू कनै जाय नौकरी लागण रा समाचार सुणाया तो बे पण घणा राजी हुया पण जमना कांट री दांई खटकै ही। जियां तियां विकास जमना ने आपरा मां अर बापू कने राख अमेरिका व्हीर व्है गियौ। 

जमना आपरी आदरा भावना, मीठी बोली अर सेवा चाकरी सूं सासू सुसरा ने राजी कर दिया। अबै सासु सुसरा जमना नै घणै लाड़ सुं राखै। बींदणी रा चौफेर बखाण करै। बे दायज आला लोओभ ने भूलगा। जमना ने दायजा सूं बैसी मानै। 

पिकास रै अमेरिक गिया बरस एक व्हैगौ पर ओजूं कागद जमना रै नांव सूं नीं आयो। फगत मां अर बापू रे खातर रिपिया भेजै। 

जमना अबै मन मांय रौवे अर विचारै कै विकास पाछो क्यूं नीं आयो, म्हनै याद पण नीं करी, कांई बो ब्याव फगत एक सूपनो हो। फेरूं बा विचारै स्यात विलायत में काम घणौ रैवतो होवैला। 

माटङसाब जमना री हालत देखा घणा दुखी व्है। माटङसाब रै अबै धोला आयगा। बरस साठ रै लगै टगै व्हैगा। माटङसाब रै कनै अबै कुण ई भाशण रो न्यूतौ नीं लावै। 

बै मन मांय घुटण लागा। विकास ओजू पाछो क्यूंनी आयो-विचारै हा। 

जमना सासू सुसरा री चकारी करै अर बै भी जमना नै घणौ लाड राखै पण बा घणी रै विजोग में फगत एक चाकर बणर रैगी। 

माटङसाब जमना सूं विकास रा फोन नंबर देखण रो कह्यो। जमना मनीआर्डर आला फोर्म माथै नंबर देखे अर बापू ने दिया।माटङसाब टेलीफोन सूं बंतल करै। अमेरिका में विकास रे घरां फोन रे घंटी बाजै। हैलो..हैलो.. म्हैं ि ण्यि से.. माटङसाब अमरजी.. (आई एम अमर स्पीकिंग फ्रोम इण्डिया) हैलो..आप चाहो तो हिन्दी में बात कर सकतै हैं मैं भी इण्डियन हूं। आप कौन.. हैलो..मैं डॉ..सुधा पंडित बोल रही हूं। मेरा मतलब डॉ. विकास की वाईफ बोल रही हूं। 

ऐक बार माटङसाब रे हाथ सूं रिसीवर छूटगौ अर जमी माथै पड़गौ। 

फेरूं बोलण लागा-म्हैं अमरीज माटङसाब जमना का बापू बोल रहा हूँ। 

सुधा..ओह! जमना...हाँ..हाँ..विकास ने मुझे बताया था कि अमेरिका आने से पहले उसने घर पर एक नौकरानी रख ली है। वह थोड़ी बहुत पढ़ी लिखी अर समझदार है। मां अर बापू की देखभाल अच्ची तरह से कर लेगी। 

माटङसाब..जमना..नौकरानी..यह क्या कर रही हो तुम! माटङसाब तो धड़ाम जमी माथै पड़गा अर अमूजणी आयगी उणनै।

जमना माटङसाब ने उठावे अर घरां ले जावै। बीं दिन जमना अर माटङसाब घणा रोया। 

विका अमेरिका जाय एक देसी (भारत) डॉक्टरणी सूं धम माल अर बंगला गाड़ियां रे लोभ में आंधौ व्है ब्याव कर लियो अर जमना ने भूलगो।  

अबै जमना विका रो घर छोड़ दियो अर एक पक्को मनसूबो मन मायं राखर बापू रो समाज सुधार आलो मारग फकड़ लियो। बींरी आंख्या सूं त्रासदी रा पतंगा उठलै हा। बहा एक घायल नारी री दांई छटपटावै ही। 

जमना अबै एक मोरचो बणायो। इणमें घणकरी सतायोड़ी लुगायां ही। सगली जमना रे साथै व्हैगी। 

इयां करता जमना एक लूठठीं समाज सुधारक बणगी। 

जमना कोर्ट में डॉ. विकास पंडित रै खिलाफ में एक केस रपट मुजब दरज करायो। कोरट रौ फैसलो डॉ. विकास रे शादीशुदा व्हैता थकां दायजा रा लोभ मे ंदूजौ ब्याव करणो जुलम में नौकरी सूं बर्खास्त कर दियौ अर जेल री करड़ी सजा सुणाय दी।

जमना एक लेखक रे साथ घर बसाय लियो। लेखक अर जमना अबै घणा सुख सूंरैवे। 

विकास जेल मांय उणरै खोटै करमां रे पांण पछतावै। जेल री काल कोठरी मांय खूणा में बैठो नीची नाड़ कर रोवे हो।

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